KAVITAYE

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Dheere Dheere (धीरे-धीरे)

बात चलेगी धीरे-धीरे. रात ढ़लेगी धीरे-धीरे. गीली लकड़ी इंतज़ार की, आँख जलेगी धीरे-धीरे. गर रिश्तों पर बर्फ जमी तो, साँस गलेगी धीरे-धीरे. एक दुआ लब पर शिकवों के, साथ पलेगी धीरे-धीरे. लेकर चाँद का...
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निरंतर वध (Nirantar Wadh)

निरंतर वध (Nirantar Wadh) न होने पर भी मैं धर्मराज नहीं युधिष्ठिर नहीं मैं मैने पांसे नहीं फैंके जुआँ नहीं खेला दांव पर नहीं लगाया कुछ, पर मेरी द्रोपदी छिन गई उठा ले गया...
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रंग की हों पपड़ियाँ उचली किसी दीवार से (Rang Ki Ho Papdiyan Uchli Kisi Diwar Se)

रंग की हों पपड़ियाँ उचली किसी दीवार से (Rang Ki Ho Papdiyan Uchli Kisi Diwar Se) अब क्योंकि हाथ ख़ाली लौटा हूँ बाज़ार से, हाथ ही सर पे फिरा दूंगा मैं उसके प्यार से,...
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Pita ka budha hona (पिता का बूढा होना)

पिता: एक तुम बुड्ढे हो गए पिता अब तुम्हें मान लेना चाहिए आने वाला है ‘द एण्ड’ तुम बुड्ढे हो गए पिता कि तुम्हारा इस रंगमंच में बचा बहुत थोड़ा-सा रोल ज़रूरी नहीं कि...
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Sapna Makaan ka (सपना मकान का)

सपना मकान का अपने मकान का कैसे हो पूरा खाली पेट लंगोटी बांधे सोच रहा है घूरा सोच रहा है घूरा कैसे कटेगी ये बरसात पैताने बैठा है कुत्ता नहीं छोडता साथ घरवालों की...
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KAVITAYE शायरी (Poetry)

Dil Ka Rishta Ajeeb Hota Hain (दिल का रिश्ता अजीब होता है)

Dil Ka Rishta Ajeeb Hota Hain (दिल का रिश्ता अजीब होता है) दिल का रिश्ता अजीब होता है दूर है जो, करीब होता है। तन्हा रातों में चाँद भी तनहा हिज्र का भी नसीब...
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जो तेरे दर पे हम नहीं आते (Jo Tere Dar Par Hum Nhi Aate)

जो तेरे दर पे हम नहीं आते (Jo Tere Dar Par Hum Nhi Aate) जो तेरे दर पे हम नहीं आते तो खुशी ले के गम नहीं आते बात कुछ तो है तेरी आँखों...
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ujalo ki ye sab bak bak bhuja do (उजालों की ये सब बकबक बुझा दो)

उजालों की ये सब बकबक बुझा दो मुझे लोरी सुना कर माँ सुला दो । तुम्हे हम धूप सा माने हुए हैं मेरे मन का ये अँधेरा मिटा दो । दिया हूँ मैं दुआ...
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वक्त के पाँव तो कुछ क़दम थे चले (Wakt Ke Paunw To Kuch Kadam Te Chale)

वक्त के पाँव तो कुछ क़दम थे चले (Wakt Ke Paunw To Kuch Kadam Te Chale) वक्त के पाँव तो कुछ क़दम थे चले तय किए ज़िंदगी ने कई फासले चलते-चलते फकत कुछ महीने...
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अब कोई बात न होगी हमारे बीच (Ab Koi Baat Na Hogi Humare Beech)

अब कोई बात न होगी हमारे बीच (Ab Koi Baat Na Hogi Humare Beech) वो अपने गुनाहों से पशेमां होठों से लफ्ज़ों को भींच मैं उसकी खताओं से परेशां उसकी नासमझी पर खीज अब...
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